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    Home»Mythology»पुरुषोत्तम मास की कथा: मल मास से पुरुषोत्तम बनने तक
    Mythology

    पुरुषोत्तम मास की कथा: मल मास से पुरुषोत्तम बनने तक

    GANPAT VYASBy GANPAT VYASMay 31, 2026
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    Table of Contents

    Toggle
    • पुरुषोत्तम मास की कथा:
      • इस पॉडकास्ट को सुनें, इसमें पुरुषोत्तम मास के बारे में और अधिक जानकारी दी गई है।
    • नारद जी का प्रश्न और माहात्म्य का आरम्भ- Purshottam Maas Ki Katha
      • दृश्य विवरण के लिए कृपया इस वीडियो को अंत तक देखें।
    • मल मास की पीड़ा-  Purshottam Maas Ki Katha
    • भगवान विष्णु मल मास को गोलोक ले गए- Purshottam Maas Ki Katha
    • श्रीकृष्ण ने दिया “पुरुषोत्तम” नाम-  Purshottam Maas Ki Katha
    • पुरुषोत्तम मास क्यों है विशेष?
    • पुरुषोत्तम मास में क्या करें?  Purshottam Maas Ki Katha
      • अवश्य करें
      • यथाशक्ति दान करें
    • इस कथा से मिलने वाली 5 महान शिक्षाएँ
    • निष्कर्ष
    • श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अन्य दिव्य प्रसंग
    • श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के सभी दिवस
    • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    पुरुषोत्तम मास की कथा:

    Purshottam Maas Ki Katha– पुरुषोत्तम मास हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। परंतु क्या आप जानते हैं कि यह वही मास है जिसे कभी “मल मास” कहकर तिरस्कृत किया जाता था? यह कथा केवल एक मास के सम्मान की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जिन्हें संसार ने कभी अस्वीकार किया हो। पुरुषोत्तम मास का माहात्म्य बताता है कि भगवान की कृपा किसी भी तिरस्कृत को पूजनीय बना सकती है। यह कथा नारद जी, भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संवाद से प्रारम्भ होती है।

    इस पॉडकास्ट को सुनें, इसमें पुरुषोत्तम मास के बारे में और अधिक जानकारी दी गई है।

    https://lifedevote.com/wp-content/uploads/2026/05/मल_मास_से_पुरुषोत्तम_बनने_की_कहानी-online-audio-converter.com_.mp3

    नारद जी का प्रश्न और माहात्म्य का आरम्भ- Purshottam Maas Ki Katha

    नैमिषारण्य में ऋषियों ने सूतजी से ऐसा ज्ञान सुनाने का आग्रह किया जो संसार सागर से पार लगाने वाला हो। तब सूतजी ने नारद जी और भगवान नारायण के मध्य हुए संवाद का वर्णन किया। नारद जी ने भगवान से पूछा कि सभी महीनों का माहात्म्य सुना है, किन्तु पुरुषोत्तम मास का माहात्म्य क्या है और यह इतना महान क्यों माना जाता है।

    दृश्य विवरण के लिए कृपया इस वीडियो को अंत तक देखें।

    मल मास की पीड़ा-  Purshottam Maas Ki Katha

    एक समय अधिक मास प्रकट हुआ। अन्य सभी मास उसे तुच्छ समझते थे। कोई शुभ कार्य उसमें नहीं किया जाता था। विवाह, यज्ञ, गृह प्रवेश, संस्कार जैसे सभी मांगलिक कार्य उससे दूर रखे जाते थे।

    लोग उसे “मल मास” कहकर पुकारते थे। यह अपमान सहन न कर पाने पर वह अत्यंत दुःखी होकर भगवान विष्णु के पास पहुँचा। उसने करुणा भरे शब्दों में कहा—

    “हे प्रभु! सभी मुझे त्यागते हैं। मेरा कोई स्वामी नहीं है। मैं सबसे अधिक अपमानित हूँ।”

    यह सुनकर भगवान विष्णु भी करुणा से भर गए।

    भगवान विष्णु मल मास को गोलोक ले गए- Purshottam Maas Ki Katha

    भगवान विष्णु मल मास को लेकर गोलोक पहुँचे जहाँ भगवान श्रीकृष्ण विराजमान थे। उन्होंने श्रीकृष्ण को सम्पूर्ण स्थिति बताई और कहा कि यह मास अत्यंत दुःखी है, इसका कोई स्वामी नहीं है।

    भगवान श्रीकृष्ण ने मल मास की व्यथा सुनी और उसे सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि अब उसे दुःखी होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे स्वयं उसे अपना नाम और अपना गौरव प्रदान करेंगे।

    श्रीकृष्ण ने दिया “पुरुषोत्तम” नाम-  Purshottam Maas Ki Katha

    भगवान श्रीकृष्ण ने घोषणा की—

    “जैसे मैं समस्त पुरुषों में पुरुषोत्तम हूँ, वैसे ही यह मास भी सभी महीनों में श्रेष्ठ होगा।”

    उन्होंने अपने दिव्य गुण, महिमा और कृपा इस मास को प्रदान कर दी। उसी क्षण मल मास “पुरुषोत्तम मास” बन गया।

    जो मास कभी उपेक्षित था, वही सभी महीनों का राजा बन गया। भगवान ने कहा कि इस मास में किया गया जप, तप, दान, व्रत और भक्ति अनेक गुना फल प्रदान करेगी।

    पुरुषोत्तम मास क्यों है विशेष?

    पुरुषोत्तम मास केवल कैलेंडर का अतिरिक्त महीना नहीं है। यह भगवान की करुणा का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि संसार भले ही किसी को तुच्छ समझे, भगवान उसे महान बना सकते हैं।

    इस मास में की गई साधना विशेष फलदायी मानी गई है क्योंकि यह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।

    पुरुषोत्तम मास में क्या करें?  Purshottam Maas Ki Katha

    अवश्य करें

    • भगवान श्रीकृष्ण का नाम जप
    • श्रीमद्भागवत श्रवण
    • भगवद्गीता पाठ
    • तुलसी पूजा
    • दीपदान
    • अन्नदान
    • गौसेवा
    • सत्संग

    यथाशक्ति दान करें

    • अन्नदान
    • वस्त्रदान
    • धार्मिक ग्रंथ दान
    • जल सेवा

    https://youtu.be/6dII_dDjrzY

     

    इस कथा से मिलने वाली 5 महान शिक्षाएँ

    1. भगवान किसी का तिरस्कार नहीं करते

    जिसे संसार छोड़ देता है, भगवान उसे अपनाते हैं।

    2. अपमान अंत नहीं है

    मल मास का अपमान ही उसके गौरव का कारण बना।

    3. ईश्वर की शरण सर्वोच्च आश्रय है

    सच्ची शरणागति जीवन बदल सकती है।

    4. भक्ति व्यक्ति को महान बनाती है

    महानता बाहरी प्रतिष्ठा से नहीं, भगवान की कृपा से आती है।

    5. पुरुषोत्तम मास आत्मिक उन्नति का अवसर है

    यह समय जीवन को नई दिशा देने का अवसर है।

    निष्कर्ष

    पुरुषोत्तम मास की कथा केवल एक पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि आशा, करुणा और ईश्वर की कृपा का संदेश है। मल मास का पुरुषोत्तम मास बनना हमें बताता है कि भगवान की दृष्टि में कोई भी तुच्छ नहीं है। यदि हम श्रद्धा, भक्ति और सेवा के साथ इस मास का पालन करें, तो आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग स्वतः खुल जाता है।

    श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अन्य दिव्य प्रसंग

    यदि आपको पुरुषोत्तम मास की यह कथा प्रेरणादायक लगी हो, तो श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अन्य अमृतमय प्रसंग भी अवश्य पढ़ें। इनमें भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य अवतार, पूतना वध, गोवर्धन लीला, महारास, कंस वध तथा उद्धव-गोपी संवाद जैसे आध्यात्मिक रहस्यों का सरल वर्णन किया गया है। इन कथाओं का श्रवण और मनन जीवन में भक्ति, श्रद्धा और भगवान के प्रति प्रेम को जागृत करता है।

    श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के सभी दिवस

    📖 प्रथम दिवस – भागवत माहात्म्य एवं नैमिषारण्य कथा
    📖 द्वितीय दिवस – ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र एवं कपिल उपदेश
    📖 तृतीय दिवस – गजेन्द्र मोक्ष, समुद्र मंथन एवं वामन अवतार
    📖 चतुर्थ दिवस – श्रीराम चरित्र एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
    📖 पंचम दिवस – बाल लीलाएँ, गोवर्धन लीला एवं रास पंचाध्यायी
    📖 षष्ठम दिवस – मथुरा लीला, द्वारका लीला एवं रुक्मिणी विवाह
    📖 सप्तम दिवस – चौबीस गुरु, कलियुग वर्णन, परीक्षित मोक्ष एवं भागवत समापन

    विशेष: पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत का श्रवण और श्रीकृष्ण नाम का स्मरण अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। इसलिए इस पावन अवसर पर सम्पूर्ण भागवत कथा श्रृंखला का लाभ अवश्य लें।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    पुरुषोत्तम मास क्या है?

    अधिक मास को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपना नाम दिए जाने के बाद पुरुषोत्तम मास कहा गया।

    इसे मल मास क्यों कहा जाता था?

    इस महीने में शुभ कार्य नहीं किए जाते थे, इसलिए इसे उपेक्षित माना जाता था।

    पुरुषोत्तम मास का स्वामी कौन है?

    भगवान श्रीकृष्ण स्वयं इसके अधिष्ठाता देव हैं।

    पुरुषोत्तम मास में कौन सा पाठ करना चाहिए?

    भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत और विष्णु सहस्रनाम का पाठ श्रेष्ठ माना जाता है।

    क्या इस मास में दान का विशेष महत्व है?

    हाँ, शास्त्रों में इस मास में दान, जप और भक्ति को अनेक गुना फलदायी बताया गया है।

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    GANPAT VYAS
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    I am Ganpat Lal Vyas son of late Shri Madan Lal Vyas and late Smt Rukmani Devi. Curiosity has always been the guiding force of my life. I am a science graduate with post-graduation in economics and served in banking for my livelihood. From my early studies, especially science, I was deeply inspired to explore beyond textbooks and classrooms. Though professional life limited deep academic pursuit, the thirst to know never faded. After retirement, I am free to explore the unknown realms of science, philosophy, and existence. This website reflects my lifelong journey of inquiry and learning.

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