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    Home»Mythology»पुरुषोत्तम मास में क्या करें? श्रीकृष्ण का दिव्य उपदेश
    Mythology

    पुरुषोत्तम मास में क्या करें? श्रीकृष्ण का दिव्य उपदेश

    GANPAT VYASBy GANPAT VYASJune 1, 2026
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    Table of Contents

    Toggle
    • श्रीकृष्ण का दिव्य उपदेश
    • युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से क्या पूछा?-
    • पुरुषोत्तम मास में क्या करें?
      • 1. श्रीकृष्ण नाम का जप
      • 2. भगवद्गीता का पाठ
      • 3. श्रीमद्भागवत का श्रवण
      • 4. तुलसी पूजन
      • 5. दीपदान
      • 6. दान और सेवा
      • 7. सत्संग
    •  पुरुषोत्तम मास में किन बातों का ध्यान रखें?
      • अवश्य करें
      • यथासंभव बचें
    • पुरुषोत्तम मास का आध्यात्मिक संदेश-
    • श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दिव्य प्रसंग-  Purshottam Maas
    • निष्कर्ष-
    • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    श्रीकृष्ण का दिव्य उपदेश

    Purshottam Maas को भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय मास कहा गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस पवित्र समय में किया गया जप, तप, दान और भक्ति साधारण दिनों की तुलना में अनेक गुना अधिक फल प्रदान करते हैं। पिछले लेख में हमने जाना कि किस प्रकार तिरस्कृत मल मास भगवान की कृपा से पुरुषोत्तम मास बना। अब प्रश्न यह है कि इस दुर्लभ अवसर का लाभ कैसे प्राप्त किया जाए?

    महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने भी भगवान श्रीकृष्ण से यही प्रश्न किया था। भगवान ने उन्हें पुरुषोत्तम मास की महिमा बताते हुए कुछ ऐसे साधन बताए जो मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बना सकते हैं।

    युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से क्या पूछा?-

    वनवास के कठिन दिनों में पांडव अनेक संकटों से घिरे हुए थे। धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि ऐसा कौन-सा व्रत और साधन है जो मनुष्य के पापों, दुःखों और दुर्भाग्य को दूर कर सकता है।

    भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया कि पुरुषोत्तम मास का श्रद्धापूर्वक पालन करने वाला व्यक्ति सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार के कल्याण को प्राप्त करता है। इसलिए इस मास में विशेष साधना करने का विधान बताया गया है।

    पुरुषोत्तम मास में क्या करें?

    1. श्रीकृष्ण नाम का जप

    भगवान का नाम स्वयं भगवान का स्वरूप माना गया है। प्रतिदिन कुछ समय निकालकर हरे कृष्ण महामंत्र या अपने इष्ट मंत्र का जप करना चाहिए।

    2. भगवद्गीता का पाठ

    पुरुषोत्तम मास में भगवद्गीता का अध्ययन विशेष फलदायी माना गया है। प्रतिदिन एक अध्याय का पाठ भी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

    3. श्रीमद्भागवत का श्रवण

    भागवत कथा को कलियुग में भगवान का साक्षात स्वरूप कहा गया है। पुरुषोत्तम मास में भागवत श्रवण से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है।

    4. तुलसी पूजन

    तुलसी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। प्रतिदिन तुलसी पूजा और परिक्रमा करने से पुण्य की वृद्धि होती है।

    5. दीपदान

    दीपक केवल प्रकाश नहीं देता, बल्कि अज्ञान के अंधकार को दूर करने का भी प्रतीक है।

    6. दान और सेवा

    अन्नदान, वस्त्रदान, जलदान तथा गौसेवा जैसे कार्य इस मास में विशेष महत्व रखते हैं।

    7. सत्संग

    सत्संग मन को शुद्ध करता है और जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।

     पुरुषोत्तम मास में किन बातों का ध्यान रखें?

    अवश्य करें

    • भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण
    • गीता पाठ
    • भागवत श्रवण
    • तुलसी पूजा
    • दीपदान
    • अन्नदान
    • सेवा कार्य
    • सत्संग

    यथासंभव बचें

    • क्रोध
    • अहंकार
    • निंदा
    • छल-कपट
    • अनावश्यक विवाद
    • असत्य भाषण

    पुरुषोत्तम मास का आध्यात्मिक संदेश-

    पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं है। यह आत्मनिरीक्षण, आत्मशुद्धि और ईश्वर के निकट आने का अवसर है।

    आज का मनुष्य बाहरी उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहा है, लेकिन आंतरिक शांति खोता जा रहा है। पुरुषोत्तम मास हमें अपने भीतर झाँकने और जीवन को भगवान की कृपा से जोड़ने की प्रेरणा देता है।

    https://youtu.be/2WPXJWiXLOE

    श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दिव्य प्रसंग-  Purshottam Maas

    पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। यदि आप भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, गोवर्धन पूजा, महारास, सुदामा चरित्र, कंस वध तथा उद्धव-गोपी संवाद जैसे प्रेरणादायक प्रसंगों का अध्ययन करना चाहते हैं, तो हमारी भागवत कथा सप्ताह श्रृंखला अवश्य पढ़ें। यह श्रृंखला भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के अमृत से जीवन को प्रकाशित करती है।

    📖 प्रथम दिवस – भागवत माहात्म्य एवं नैमिषारण्य कथा
    📖 द्वितीय दिवस – ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र एवं कपिल उपदेश
    📖 तृतीय दिवस – गजेन्द्र मोक्ष, समुद्र मंथन एवं वामन अवतार
    📖 चतुर्थ दिवस – श्रीराम चरित्र एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
    📖 पंचम दिवस – बाल लीलाएँ, गोवर्धन लीला एवं रास पंचाध्यायी
    📖 षष्ठम दिवस – मथुरा लीला, द्वारका लीला एवं रुक्मिणी विवाह
    📖 सप्तम दिवस – चौबीस गुरु, कलियुग वर्णन, परीक्षित मोक्ष एवं भागवत समापन

    विशेष: पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत का श्रवण और श्रीकृष्ण नाम का स्मरण अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। इसलिए इस पावन अवसर पर सम्पूर्ण भागवत कथा श्रृंखला का लाभ अवश्य लें।

    निष्कर्ष-

    भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि पुरुषोत्तम मास साधारण समय नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का विशेष अवसर है। यदि हम श्रद्धा, भक्ति, सेवा और नामस्मरण के साथ इस मास का पालन करें, तो जीवन में शांति, संतोष और ईश्वर की कृपा का अनुभव कर सकते हैं।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    पुरुषोत्तम मास में सबसे महत्वपूर्ण साधना क्या है?

    भगवान का नाम जप और श्रीकृष्ण स्मरण।

    क्या पुरुषोत्तम मास में गीता पढ़नी चाहिए?

    हाँ, गीता पाठ अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

    क्या भागवत कथा सुनना आवश्यक है?

    शास्त्रों में भागवत श्रवण को विशेष महत्व दिया गया है।

    क्या दान करना आवश्यक है?

    दान श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए।

    पुरुषोत्तम मास का मुख्य उद्देश्य क्या है?

    आत्मशुद्धि, भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण।

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    GANPAT VYAS
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    I am Ganpat Lal Vyas son of late Shri Madan Lal Vyas and late Smt Rukmani Devi. Curiosity has always been the guiding force of my life. I am a science graduate with post-graduation in economics and served in banking for my livelihood. From my early studies, especially science, I was deeply inspired to explore beyond textbooks and classrooms. Though professional life limited deep academic pursuit, the thirst to know never faded. After retirement, I am free to explore the unknown realms of science, philosophy, and existence. This website reflects my lifelong journey of inquiry and learning.

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