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    Home»Mythology»Purshottam Maas stotra : पुरुषोत्तम मास में कौन से स्तोत्र पढ़ने चाहिए
    Mythology

    Purshottam Maas stotra : पुरुषोत्तम मास में कौन से स्तोत्र पढ़ने चाहिए

    GANPAT VYASBy GANPAT VYASMay 18, 2026
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    Table of Contents

    Toggle
    • Purshottam Maas stotra : पुरूषोत्तम मास का दिव्य साधना रहस्य
        • Purshottam Maas stotra की दिव्य साधना पर यह श्रोता दर्शन। 
      • Purshottam Maas stotra में विष्णु सहस्रनाम का महत्व
        • इस वीडियो में जानिए अधिमास में पढ़े जाने वाले प्रमुख स्तोत्रों और उनके आध्यात्मिक महत्व के बारे में सरल हिंदी में।
        • विष्णुसहस्रनाम क्यों पढ़ें?
      • एमएस सुब्बुलक्ष्मी द्वारा प्रस्तुत सबसे लोकप्रिय विष्णुसहस्त्रनाम प्रस्तुति।
        • प्रसिद्ध श्लोक
      • Purshottam Maas stotra में गजेन्द्र मोक्ष क्यों पढ़ें?
        • गजेन्द्र मोक्ष क्यों?
      • गजेंद्र मोक्ष सबसे भक्ति और समर्पण स्तोत्र हिंदी में सुनें
      • Purshottam Maas stotra एवं भगवद्गीता उत्तम योग
        • सर्वोच्च योग का महत्व
        • महत्वपूर्ण श्लोक
      • Purshottam Maas stotra में भीष्म स्तवन का रहस्य
        • भीष्म स्तवन का आध्यात्मिक अर्थ
      • भीष्म स्तवन रमेश भाई जी ओझा द्वारा 
      • Purshottam Maas stotra एवं अनुस्मृति साधना-अनुस्मृति का गुप्त रहस्य
        • अनुस्मृति क्यों महत्वपूर्ण है?
      • Purshottam Maas stotra में कौन से स्तोत्र पढ़ें: दैनिक साधना कैसे करें?
        • अतिरिक्त साधनाएँ
      • Purshottam Maas stotra में कौन से स्तोत्र पढ़ें और उनका वास्तविक उद्देश्य
      • Q1. पुरषोत्तम मास स्तोत्र में कौन सा स्तोत्र सबसे श्रेष्ठ माना जाता है?
      • Q2. भगवद्गीता में पुरषोत्तम मास स्तोत्र का पाठ क्या करना चाहिए?
      • Q3. पुरूषोत्तम मास स्तोत्र गज मोक्षेन्द्र का क्या महत्व है?
      • Q4. कौन सी महिलाएं भी पढ़ सकती हैं ये पुरूषोत्तम मास स्तोत्र?
      • Q5. पुरषोत्तम मास स्तोत्र में क्या एकमात्र पाठ्य व्यवस्था है?

    Purshottam Maas stotra : पुरूषोत्तम मास का दिव्य साधना रहस्य

    अधिमास, जिसे सर्वोच्च मास भी कहा जाता है, सनातन परंपरा में भगवान विष्णु की विशेष पूजा का महीना माना जाता है। यह केवल पंचांग का अतिरिक्त मूल्य नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि, हरि-स्मरण और आध्यात्मिक स्वर्ग का दिव्य अवसर है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस काल में जप, पाठ, दान और विष्णु भक्ति Purshottam Maas stotra का फल कई गुना बढ़ जाता है।

    विशेष रूप से कुछ स्तोत्र और ग्रंथ ऐसे हैं जिनमें अधिमास में अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। इनमें विष्णु सहस्रनाम, गज मोक्षेन्द्र, भीष्म स्तवन, अनुस्मृति और भगवद्गीता के 15वाँ अध्याय–परमात्मा योग–प्रमुख हैं।

    Purshottam Maas stotra की दिव्य साधना पर यह श्रोता दर्शन। 

    https://lifedevote.com/wp-content/uploads/2026/05/पुरुषोत्तम_मास_स्तोत्र_और_मानसिक_शांति-online-audio-converter.com_.mp3

    अधिमास में श्रवण, जप और हरि-स्मरण को सबसे श्रेष्ठ साधना माना गया है। नियमित रूप से इन स्त्रोतों का श्रवण मन को शांत और स्थिर बनाता है।

    अधिमास का मूल उद्देश्य मन को दुनिया की भागदौड़ से लेकर डायनासोर भगवान की ओर ले जाना है। इसलिए इस महीने में ऐसे स्तोत्र पढ़े जाते हैं जो:

    • मन को शांत करो
    • बहुत कम करो
    • विष्णु स्मरण संवर्धन
    • आत्मबल और भक्ति जगे

    वैश्वीकरण से लेकर वैष्णव परंपरा में कुछ विशेष ग्रंथों का पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    Purshottam Maas stotra में विष्णु सहस्रनाम का महत्व

    विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के हजारों दिव्य आश्रमों का संग्रह है। महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा बताए गए इस स्तोत्र को कलियुग की महान साधना माना गया है।

    इस वीडियो में जानिए अधिमास में पढ़े जाने वाले प्रमुख स्तोत्रों और उनके आध्यात्मिक महत्व के बारे में सरल हिंदी में।

    विष्णु सहस्रनाम, गज मोक्षेन्द्र, भीष्म स्तवन और सर्वोच्च योग केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि आध्यात्मिक परिवर्तन की गहन साधनाएँ हैं।

    विष्णुसहस्रनाम क्यों पढ़ें?

    • मानसिक शांति के लिए
    • भय और चिंता दूर करने के लिए
    • हरि स्मरण बढ़ाने के लिए
    • आध्यात्मिक शक्ति जागृति के लिए

    एमएस सुब्बुलक्ष्मी द्वारा प्रस्तुत सबसे लोकप्रिय विष्णुसहस्त्रनाम प्रस्तुति।

    प्रसिद्ध श्लोक

    दुर्गान्यतितरत्याषु पुरुषः पुरूषोत्तम।
    स्तुवन्नमसहस्रेण नित्यं भक्तिसमन्वितः॥

    अर्थात जो भक्त श्रद्धेय से सर्वोच्च भगवान का सहस्रनाम पाठ करता है, वह जीवन की कुंजी को पार कर जाता है।

    यह भी पढ़ें:
    गजेंद्र मोक्ष की कथा और पूर्ण शरणागति का रहस्य

    Purshottam Maas stotra में गजेन्द्र मोक्ष क्यों पढ़ें?

    गजेंद्र मोक्ष भागवत पुराण का अत्यंत प्रसिद्ध प्रसंग है। इसमें हाथी संकट नामक गजेंद्र नामक व्यक्ति पूर्ण दान से भगवान विष्णु को बुलाता है और भगवान अपनी रक्षा करते हैं।

    गजेन्द्र मोक्ष क्यों?

    • विनम्रता से मुक्ति
    • ईश्वर पर विश्वास
    • संकट में गंभीरता
    • शरणागति की भावना

    गजेंद्र मोक्ष सबसे भक्ति और समर्पण स्तोत्र हिंदी में सुनें

    यह कथा हमें सिखाती है कि जब मनुष्य अपनी सीमा मानकर ईश्वर को बुलाता है, तभी वास्तविक आध्यात्मिक परिवर्तन प्रारंभ होता है।

    यह भी पढ़ें:
    भगवदगीता अध्याय 15 : आदर्श योग का गूढ़ रहस्य

    Purshottam Maas stotra एवं भगवद्गीता उत्तम योग

    भगवद्गीता का 15वाँ अध्याय “पुरुषोत्तम योग” है। यह अध्याय आत्मा, संसार और परमात्मा के गहरे संबंध को समझाता है।

    सर्वोच्च योग का महत्व

    • जीवन का संतुलन
    • आत्मा का ज्ञान
    • दुनिया की यादें
    • परम पुरुष की पहचान

    महत्वपूर्ण श्लोक

    यस्मात्क्षरमतीतोऽहमाक्षरादपि चोत्तमः।

    भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे नश्वर और अज्ञानी दोनों से श्रेष्ठ हैं, इसलिए सर्वोच्च हैं।

    Purshottam Maas stotra में भीष्म स्तवन का रहस्य

    भीष्म स्तवन महाभारत का अत्यंत भावपूर्ण भाग है जिसमें भीष्म पितामह मृत्यु शय्या पर भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करते हैं।

    भीष्म स्तवन का आध्यात्मिक अर्थ

    • मृत्यु के भय से मुक्ति
    • धर्म का स्मरण
    • कृष्ण के विराट स्वरूप का ध्यान
    • वैराग्य और दान

    भीष्म स्तवन रमेश भाई जी ओझा द्वारा 

    Purshottam Maas stotra एवं अनुस्मृति साधना-अनुस्मृति का गुप्त रहस्य

    अनुस्मृति का अर्थ है – निरंतर ईश्वर स्मरण। यह बाह्य अनुष्ठान से अधिक आंतरिक साधना का मार्ग है।

    अनुस्मृति क्यों महत्वपूर्ण है?

    • मन को स्थिर करता है
    • हरि-स्मरण को निरंतर स्थापित किया जाता है
    • ध्यान और भक्ति को गहरा करता है

    अधिमास में अनुस्मृति साधना मन की ओर मुड़ती है।

    यह भी पढ़ें:
    अनुस्मृति स्तोत्र और निरंतर हरि स्मरण का रहस्य

    Purshottam Maas stotra में कौन से स्तोत्र पढ़ें: दैनिक साधना कैसे करें?

    समय साधना
    प्रातः विष्णुसहस्रनाम
    दोपहर भगवद्गीता अध्याय 15
    शाम गजेन्द्र मोक्ष
    रात्रि भीष्म स्तवन

    अतिरिक्त साधनाएँ

    • तुलसी पूजा
    • दान
    • हरिनाम जप
    • एक समय भोजन
    • भागवत श्रवण

    Purshottam Maas stotra में कौन से स्तोत्र पढ़ें और उनका वास्तविक उद्देश्य

    इन सभी स्तोत्रों का मूल उद्देश्य केवल पाठ करना नहीं है, बल्कि मन को भगवान विष्णु की पहचान से जोड़ना है। अधिमास हमें रुककर अंदर देखने का अवसर देता है।

    यह:

    • आत्मनिरीक्षण का
    • भक्ति का
    • वैराग्य का
    • हरि-स्मरण का

    विशेष समय माना गया है।

    Q1. पुरषोत्तम मास स्तोत्र में कौन सा स्तोत्र सबसे श्रेष्ठ माना जाता है?

    विष्णु सहस्रनाम को अधिमास की सबसे श्रेष्ठ साधनाओं में माना गया है।

    Q2. भगवद्गीता में पुरषोत्तम मास स्तोत्र का पाठ क्या करना चाहिए?

    हाँ, विशेष रूप से अध्याय 15 — सर्वोच्च योग — का पाठ अत्यंत शुभ माना गया है।

    Q3. पुरूषोत्तम मास स्तोत्र गज मोक्षेन्द्र का क्या महत्व है?

    यह पूर्ण शरणगति और भगवान पर विश्वास का महान संदेश देता है।

    Q4. कौन सी महिलाएं भी पढ़ सकती हैं ये पुरूषोत्तम मास स्तोत्र?

    हाँ, श्रद्धा और भक्ति से कोई भी इन स्तोत्रों का पाठ कर सकता है।

    Q5. पुरषोत्तम मास स्तोत्र में क्या एकमात्र पाठ्य व्यवस्था है?

    पाठ के साथ जप, दान, साधना और मन की शुद्धि को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    अधिमास गजेन्द्र मोक्ष पुरुषोत्तम मास पुरुषोत्तम योग भगवद्गीता भीष्म स्तवन विष्णु भक्ति विष्णु सहस्रनाम सनातन धर्म
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    I am Ganpat Lal Vyas son of late Shri Madan Lal Vyas and late Smt Rukmani Devi. Curiosity has always been the guiding force of my life. I am a science graduate with post-graduation in economics and served in banking for my livelihood. From my early studies, especially science, I was deeply inspired to explore beyond textbooks and classrooms. Though professional life limited deep academic pursuit, the thirst to know never faded. After retirement, I am free to explore the unknown realms of science, philosophy, and existence. This website reflects my lifelong journey of inquiry and learning.

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